छात्रों के लिए विशेष…


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किसी किसी छात्र की यह शिकायत है कि जब वे मन को एकाग्र करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें सिरदर्द होने लगता है ।

इसका मुख्य कारण यह है कि उनके मस्तिष्क में यथेष्ट शक्ति नहीं है । मस्तिष्क को सुदृढ बनाने के लिए किसी योग्य व्यक्ति के मार्गदर्शन में कुछ विशेष योगासनों का अभ्यास करना चाहिए ।

इसके साथ ही किसी अच्छे चिकित्सक कीं सलाह लेकर पौष्टिक भोजन, टॉनिक, च्यवनप्राश आदि का भी सेवन किया जा सकता है ।

प्रतिदिन उचित माला में दूध, मक्खन तथा घी अवश्य लेना चाहिए । ब्रह्मचर्यं पालन करने के लिए कुछ सहज सुझाव दिये जाते हैं ।

अपने अन्तर मे स्थित आत्मा के समक्ष सच्चे ह्रदय से ब्रह्मचर्य की शक्ति को बनाये रखने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए ।

शरीर तथा मन को सदेव शुद्ध रखना चाहिए ।

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अपने रहस्य किसी को मत बताओ..


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अपने रहस्य किसी को मत बताओ

ये आदत आपको ख़त्म कर देगी ।

आप अगर ऐसा सोचते है की सब कुछ अच्छा होगा.. तो जरुर वही होगा ।

छात्रों की लापरवाही..


कुछ विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थ निद्रा में वृद्धि करते हैं । मेरा मानना है ऐसे पदार्थो का त्याग ही कर देना चाहिए।

मन तभी सबल होगा, जब शरीर के विभित्र अंग स्वच्छ रखे जाये । इसके अलावा पहनने के वस्त्र, बिस्तर आदि उपयोग कीं सारी वस्तुएँ साफ रहने चाहिए

कमरे की अन्य सभी वस्तुएँ तथा डेली उपयोग कीं चीजे सुव्यवस्थित रूप से रखी जाये । यह श्रृंखला सबल रुप से मन की जागस्क अवस्था को प्रकट करती है ।

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अधिकांश छात्रो में लापरवाही का भाव ही देखने में आता है । उनकी व्यक्तिगत चीजों तथा पुस्तकों की दुरवस्था को देखकर हम आसानी से समझ सकते हैं कि वे कितने लापरवाह हैं । क्या आप भी उनमें से तो नही..??

विद्यार्थियों के जानने योग्य एक दुसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि शरीर के समान ही मन को भी स्वच्छ रखना आवश्यक हैं । नेगटिव विचारों को मन मे प्रवेश करने से रोका जाना चाहिए, मन को उनकी हवा तक नहीं लगने देनी चाहिए, क्योकि ये विचार ही हमारे मन में तबाही लाने तथा उसे बिगाड़ने का मूलभूत कारण हैं ।

―स्वयं विचार कीजिये ।

पढ़ने बैठने से पहले..


पढ़ने के दौरान परिवार को कोई सदस्य आपसे विनम्रतापूर्वक किसी कार्य को करने के लिए कहता है। इसलिए आपको पढ़ने बैठने से पहले उन्हें बता दे ―कृपया, एक घंटे के पूर्व मुझे ना बुलाये“, ” मुझे डिस्टर्ब ना करें ।”

―क्योकि यदि मन मे किसी के बुलाने की संभावना बनी रही तो पूरी तौर से पढ़ाई में एकाग्र नही हो सकते । एकाग्र का इंग्लिश अनुवाद है Concentrate.. अर्थात पढ़ाई के दौरान उसमे पूरी तरह लीन रहना, ये महत्व रखता है ।

आपको वही मिलेगा, जो हमेशा से मिलता आया है..


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यदि आप वही करते हैं, जो आप हमेशा से करते आये हैं तो आपको वही मिलेगा, जो हमेशा से मिलता आया है ।

जब तक आप परिवर्तन नही करते तब तक आपको कुछ भी नया प्राप्त नही होगा ।

क्योकि यह सत्य ही है जो व्यक्ति स्वयं बदलाव की श्रेणियां नही अपनाता वह कुछ भी प्राप्त नही कर पाता ।

जो कर रहे हैं..उसमे बदलाव लाने का प्रयास अवश्य करें, मेरा मानना है आपको अवश्य कुछ नया परिणाम प्राप्त होगा ।

पुस्तक पढ़ डालने मात्र से ही अध्ययन नहीं हो जाता..


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यह भी उचित होगा कि अध्ययन के लिए एक बार में एक ही विषय लिया जाय । जब अध्ययन के लिए एक निर्धारित विषय चुन लिया गया, उसके बाद मन को कम से कम घण्टे भर उसी में तल्लीन रखा जाय ।

किसी पुस्तक को पढ डालने मात्र से ही अध्ययन नहीं हो जाता । पुस्तक को केवल पढ़ डालने और उसका अध्ययन करने के बीच जो अन्तर है, उसे अवश्य हो समझ लेना चाहिए ।

एकाग्रता दोनों मे ही लगती हैं ।

जल्दबाजी मे किसी पुस्तक को पढ़कर पाठक उसके सार संक्षेप से परिचित हो सकता है । परन्तु विस्तारित अध्ययन मन को इस योग्य बना देता है कि वह विषय वस्तु कीं गहराई में उतरकर उसके यथार्थ तात्पर्यो को जान ले, जो बहुधा सरसरी निगाह से छिपे रहते हैं ।

इसके फलस्वरूप विषय वस्तु पर अच्छी पकड़ हो जायगी और आगे के अध्ययन में भी सहायता मिलेगी ।

स्वयं विचार कीजिये ―

कुछ छात्र अक्सर ऐसा करते है..


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एक बार लिखने या पढ़ने बैठ जाने के बाद अनावश्यक रूप से अपना शरीर नहीं हिलाना चाहिए । बहुत से छात्र पढ़ते समय बडी बेढंगी मुद्रा मे बैठते हैं ।

कुछ अन्य छात्र भी होते हैं, जो पढ़ते समय अनावश्यक भाव से किसी वस्तु की ओर घूरते हुए अपना पेंसिल या पेन चबाते रहते हैं, मानो वे किसी गहरे चिन्तन में डूबे हुए हों ।

ऐसे ही और भी कई प्रकार की आदतें देखने मे आती हैं । ये सभी एकाग्रता में बाधक हैं । तो आपकी पढ़ाई क्या पढ़ाई रह जाती है? क्या आप इस तरह सिख पाएंगे? बिल्कुल नही..

जैसे एक हिलते हुए बर्तन मे रखा हुआ पानी स्थिर नहीं रह सकता, वैसे ही शरीर की मुद्राएँ बदलते रहने से मन भी चंचल होता रहता है ।

अत: अध्ययन के समय एक उचित तथा स्थिर अवस्था मे बैठना बड़ा महत्व रखता हैं। ध्यान रखिये..

क्या आपने विचार किया है..


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बोलने से पहले शब्द मनुष्य के वश में होते है ।

परन्तु बोलने के बाद मनुष्य शब्दों के वश में हो जाता है ।

क्या आपने कभी विचार किया है…

जब आप feel करते है..


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जब आप Feel करते हैं कि आप कुछ नही जानते.. तब आप बहुत कुछ करना आरम्भ करते है । वास्तव में सीखने की दृढ़ इच्छा तभी जन्म लेती है ।

और यह सत्य ही है जब व्यक्ति को कुछ सीखने की भूख लगी हो, तभी वह कुछ सिख पाता है । अन्यथा वो अपने भाग्य को कोसता रहता है ।

“पश्यताप करता रहता है―”

“वास्तव में मैंने अगर संघर्ष किया होता, तकलीफ ही सही..सहन करके कुछ किया होता तो आज मेरे पास उस प्रश्न का उत्तर अवश्य होता ।”

मुस्कुराना सीखना पड़ता है..


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मुस्कुराना सीखना पड़ता है..

“रोना तो पैदा होते ही आ जाता है ।”

कभी- कभी..


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कभी कभी मजबूर हो जाता हूँ सोचने पर.. Who am I..

अपने अस्तित्व को जानने की चेष्टा करता रहता हूं । कुछ सोचने का प्रयास करता हूँ .. कभी कभी पूरी रात चली जाती है ।

..और कब सोचते सोचते सो जाता हूँ पता ही नही चलता ।

जहां तक रास्ता दिखे वहां तक चलिये..


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जहां तक रास्ता दिखे, वहां तक चलिये..

आगे का रास्ता वहां पहुचने के बाद दिख जाएगा ।